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प्रियंका और ऋषि की अमर प्रेम कहानी - मेरी पहली कहानी।

बात उन दिनों की है जब अल्मोड़ा के पास स्थित छोटे से गाँव हरियापुर में नौजवानों और नवयुवतियों की एक नई जमात तैयार हो रही थी। प्रियंका और ऋषि भी उन्हीं में से थे। संयोग से दोनों एक दूसरे के पड़ौसी भी थे। एक दिन सुबह-सुबह जब ऋषि रोज की तरह दौड़ लगा के आ रहा था तो सामने से जाती प्रियंका से चलते-चलते पूँछा- क्या हाल चाल है प्रियंका, सब मजे में? प्रियंका ऋषि के प्रश्न को जानबूझकर अनसुना करते हुए अपने रसभरे अधरों पर मंद शरारती मुस्कान बिखेरती हुई व इठलाती हुई आगे बढ़ गयी। उसकी इसी मादक अदा के ही तो दीवाने थे हरियापुर के सभी नवयुवक। लेकिन ऋषि को प्रियंका का यूँ अनदेखा किया जाना बिलकुल अच्छा नहीं लगा।
        दोनों के परिवारों में थोड़ी आपसी कलह अलग थी। कभी-कभार हाय-हैलो भर हो जाया करती थी। वैसे भी दोनों एक ही गांव के होते हुए भी अलग-अलग कुटुंब व अलग-अलग जाति से थे। जहाँ प्रियंका उच्च कुलीन वर्ग के ब्राम्हण परिवार से थी वहीं ऋषि एक दलित समुदाय से ताल्लुक रखता था। प्रियंका के पिता गाँव के मंदिर में पुजारी व माँ पास ही के प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका थी। दूसरी और ऋषि के पिता सामान्य कृषक व मजदुर थे …

भारत की ऊर्जा सुरक्षा में ओएनजीसी विदेश (ओवीएल) का योगदान।

संरक्षण के सिद्धांत के अनुसार ऊर्जा को ना कभी नष्ट किया जा सकता हैं और ना ही सृजित। ऊर्जा को सिर्फ एक रूप से दूसरे रूप में बदला जा सकता है। इस ब्रम्हाण्ड की कुल ऊर्जा नियत है।

        जिस प्रकास एक मानव शरीर के सुचारू सञ्चालन के लिए ऊर्जा की जरुरत अहम होती है, ठीक उसी प्रकार किसी भी देश की ऊर्जा सुरक्षा को पूरा किये बिना उच्च विकास दर से गति देना संभव नहीं है। दुनियाभर में विभिन्न ऊर्जा स्रोतों के बढ़ते दोहन के लिए प्रमुख कारण भी यही है ताकि वहाँ की सरकारें अपने नागरिकों की जिंदगी, व्यवसाय, विनिर्माण क्षेत्र, आईटी सेक्टर, गुड गवर्नेंस एवं शिक्षा के क्षेत्र को गति दे सकें। समय के साथ ऊर्जा की बढ़ती मांगों को पूरा करने के लिए देश में कई निजी एवं सार्वजानिक क्षेत्र की बड़ी-बड़ी कम्पनियाँ नए ऊर्जा क्षेत्रों की खोज, अनुसंधान एवं उनके विकास में बड़ी भारी मात्रा में निवेश कर रहे हैं। साथ ही इन ऊर्जा स्रोतों से संसाधनों के दोहन, परिष्करण एवं वितरण पर भी काम कर रही हैं। विभिन्न प्रकार के ऊर्जा स्रोतों के प्रकार के आधार पर देश में प्राकृतिक गैस निगम लिमिटेड (ओएनजीसी), आईओसीएल, बीपीसीएल, एनएचपीसी, …

Reject The Caste System Before Questioning Caste Based Reservation

First come with justified solutions than talk about cancellation of caste based reservations please, otherwise keep your mouth shut. This is really unfortunate that the people who always talk about the cancellation of caste based reservation, just talk about cancellation of caste system and do noting on ground. It hurts and challenge the dignity of millions of the people of the nation when ever you raise the caste based reservation issue. You buddy get senty only if some film shows reality of your unreasonable and orthodox practices.
          Actually, you are scared of being equalize yourself in dignity and financial condition. Did you ever think about to marry your sisters or daughters with any untouchable to destroy this caste system first at least in case of arranged marriage? Indeed, we can't impose it in case of love marriage. Why don't you make up your mind to break this caste system first. People who benefited by reservations, almost all of them are giving a better a…

प्रेम एक पंछी है।

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जब हम किसी से कहते हैं: आई लव यू, तो दरअसल हम किसी बारें में बात कर रहे होते हैं? इन शब्दों के साथ हमारी कौनसी मांगें और उमीदें, कौन कौन सी अपेक्षाएं और सपने जुड़े हुए हैं ! तुम्हारे जीवन में सच्चे प्रेम की रचना कैसे हो सकती है?
          तुम जिसे प्रेम कहते हो, वह दरअसल प्रेम नही है। जिसे तुम प्रेम कहते हो, वह और कुछ भी हो सकता है, पर वह प्रेम तो नहीं ही है। हो सकता है कि वह सेक्स हो। हो सकता है कि वह लालच हो। हो सकता है कि अकेलापन हो। वह निर्भरता भी हो सकता है। खुद को दूसरों का मालिक समझने की प्रवृति भी हो सकती है। वह और कुछ भी हो सकता है, पर वह प्रेम नहीं है। प्रेम दूसरों का स्वामी बनने की प्रवृति नही रखता। प्रेम का किसी अन्य से लेना देना होता ही नहीं है। वह तो तुम्हारे प्रेम की एक स्थिति है। प्रेम कोई सम्बन्ध नहीं है। हो सकता है कि कोई सम्बन्ध बन जाए, पर प्रेम अपने आप में कोई सम्बन्ध नहीं होता। सम्बन्ध हो सकता है, पर प्रेम उसमें सीमित नहीं होता। वह तो उससे कहीं अधिक है।

कृषक-मित्र बनें, कृषक-शत्रु नहीं। उनसे प्रेम करें, नफरत नहीं।

कृपया पूरा पढ़े हालाँकि आप इसे पढ़ने के लिए बाध्य नहीं हैं।
5 रूपये वाली 'बीयर' की बोतल आज 80 रुपये में बिक रही है, क्या आप में से किसी ने कभी 'बीयर' अथवा 'दारु' का ठेका फूँका? इसका मतलब यह कतई नहीं निकाला जाना चाहिए कि मैं बीयर अथवा शराब को सस्ते में बेचे जाने का पक्षधर हूँ।300 ml की 25 पैसे कीमत वाली कोकाकोला/पेप्सी आज 12 रुपये की एवं 1.0 लीटर वाली माज़ा 50 रूपये में बिक रही है, क्या कभी किसी ने अमेरिका का पुतला फूंका? इसका मतलब यह नहीं कि मैं कोल्ड ड्रिंक्स को को सस्ते में बेचे जाने का पक्षधर हूँ।मुफ्त में मिलने वाले ताजे पानी एवं प्याऊ की जगह, 15-20 रूपये में मिलने वाली एक-डेढ़ लीटर की बोतल ने ले ली है, क्या कभी किसी ने सरकार से रेलवे-स्टेशन, बस-स्टैंड के साथ साथ सार्वनिक जगहों पर मुफ्त पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए मांग उठाई?5 रूपये वाला Mac-Donald बर्गर आज 55 रुपये में बिक रहा है, क्या कभी किसी ने Mac-Donald के विरोध में रेल रोकी?5 रूपये का चिप्प्स का पैकेट आज 30 रूपये में बिक रहा है, क्या कभी किसी ने इसके खिलाफ धरना-प्रदर्शन किया?5 रुपये में मिलने वाला सिनेमाघर…

भारतीय छद्म-धर्मनिरपेक्षता (Indian Pseudo Secularism)

कल रात से एक प्रश्न मेरे दिमाग में घूम रहा है, जिसे फेसबुक भी पर पोस्ट करना चाह रहा था। लेकिन फिर मैं ने सोचा कि आज ईद की छुट्टी का उपयोग फेसबुक के बजाय विकिपीडिया पर बिताकर किया जाय तो ज्यादा अच्छा रहेगा।
          कल शाम एक हिन्दू सिक्यूरिटी गार्ड को एक मुस्लिम कर्मचारी को आगे से "असलाम वालेकुम" बोलते देखा तो मैं अनायास ही मन में सोचने लगा कि यार कभी किसी गैर हिन्दू के द्वारा किसी हिन्दू को राम-राम भाई, जय श्री कृष्णा... बगैरह बोलते हुए कभी नहीं देखा। यहाँ तक कि किसी सिख भाई को भी नहीं। जबकि हम किसी भी सरदार से मिलते है तो सबसे से पहले उन्हें "सत्श्रीअकाल सरदार जी" कह कर संबोधित करते हैं। साथ ही हम सिख गुरुओं का सम्मान एवं पूजन भी करते हैं। उनकी जीवनियाँ पढ़कर उन से प्रेरणा लेते हैं।

व्यंग्य: क्योंकि हम इन्सान हैं।

प्रभु सब तेरी माया है। तुने ही संसार बनाया है। तेरी मर्जी के बिना पत्ता तक नहीं हिल सकता, सत्य है। लेकिन परमेश्वर तू धरती पर आकर तो देख, तू खुद हिल जायेगा। प्रभु सतयुग में आकर लीला कर गये। पता है हमें आपने राम बनकर मर्यादा का पाठ पढाया था। सुधर के रख दिया आपने राक्षसों को और जो न सुधरे उनको पहुंचा दिया ऊपर। तुमने कृष्ण बनकर प्रेम की गंगा बहा दी, खूब बंसी बजायी, पर अपनी समझ में ये नहीं आता दीनबंधु की आपने तो बंसी बजाना सिखाया था, ये कलयुगी मानव बंद बजाना कहाँ से सीख गया। ठीक है अयोध्यापति, आपने राम बनकर अयोध्या पर शासन किया था। हे द्वारिकाधीश, संसद की अध्यक्षता करके बताइए, आपको पता चल जायेगा। जब सत्तापक्ष अपने महान कार्यों के बारें में बताएगा। हम तो कहते हैं, इन बातों को मारिये गोली। अगर आप से मिलने सुदामा आएगा तो आप उनसे मिलेंगे या नहीं, इस बात पर करोड़ों रूपये का सत्ता लग जायेगा।